आयी दिवाली, खुशियाँ लायी,
घर आँगन की हुई सफ़ाई।
भैया ने नई पतलून सिलवाई,
दीदी ने सुंदर साड़ी लाई।
लक्ष्मी पूजन की पावन बेला,
जगमग दीपों की पावन माला।
दूर करती अमावस का अँधियारा,
आज रात भी लगती जैसे सवेरा।
घर का आँगन जगमग बोले,
बच्चे आज खुशी से डोले।
चकरी, अनार और फुलझड़ी,
सब ने मिल कर रॉकेट छोड़े।
ख़त्म हुए जब सारे पटाखे,
बच्चे बैठे तब मुँह फुलाके।
मम्मी ने मुँह में ठूंसे लड्डू,
पापा बोले बस कर तू, बस कर तू।

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